मूँग दाल का हलवा स्वादिष्ट बनाने की विधि – Moong DalHalva

Moong Dal Halva

मूँग दाल का हलवा स्वादिष्ट बनाने की विधि –  एक राजपूती (शिवपूत) मिठाई है। इसे सही विधि से बनाने पर इसके स्वाद का कोई मुकाबला नहीं होता।

शादी ब्याह या विशेष बड़े त्यौहार पर मूंग दाल का हलवा बनाया जाता है। यह प्रोटीन युक्त लाभदायक हलवा है जिसे सभी पसंद करते है।

मूँग दाल का हलवा बनाने का तरीका इस प्रकार है :

मूँग दाल का हलवा बनाने की सामग्री Moong dal halwa samagri

मूँग दाल छिलके वाली 250 ग्राम मावा 100 ग्राम चीनी 300 ग्राम देशी घी 300 ग्राम गेंहू का आटा 2 चम्मच बादाम 15 -20 केसर 1 /4 छोटी चम्मच इलायची 5 पीसी हुई काजू 15 -20 पिस्ता 10 पानी 2 कप मूँग दाल का हलवा बनाने की विधि Moong Dal Halva Recipe — मूँग की छिलके वाली दाल को 4-5 घण्टे के लिए पानी में भिगो दीजिये।

— दाल भीगने के बाद दाल के छिलके अलग कर लीजिये।
— छिलके अलग की हुई दाल को ग्राइंडर में दरदरा (सूजी जैसा ) पीस ले।दाल पीसते समय पानी बहुत कम जितना पीसने के लिए जरूरत हो उतना ही डालना चाहिए।
— यदि लगे की दाल में पानी थोड़ा ज्यादा है तो एक मलमल के कपड़े में दाल को बांधकर थोड़ी देर लटका देवे।
— मावे को कददूकस कर लें।
— बादाम गरम पानी दो घण्टे भिगो दें। भीगी बादाम को छीलकर लम्बी लम्बी काट लें।
— काजू के दो टुकड़े कर लें।
— पिस्ता की बारीक़ कतरन कर लेवे।
— हरी इलायची को छीलकर पीस लें।
— केसर को गुनगुने पानी में भिगो दें।
— हलवा बनाने के लिए नॉन स्टिक या भारी तले की कढ़ाई ले ।
— कढ़ाई में 200 ग्राम घी डालकर गर्म करें।
— घी गर्म होने के बाद गैस की आंच मध्यम करें व दो चम्मच गेंहू का आटा डालकर सेकें।
— आटा भूनने के बाद दाल का पेस्ट भी डाल दें व गैस बन्द कर दें।
— अब घी व दाल को अच्छी तरह मिलाए तथा गैस वापस चालू करें व लगातार हिलाते हुए मध्यम आंच पर सेकें।
— पंद्रह मिनिट तक इसी तरह सेकें।
— अब बचा हुआ घी तेज गर्म करे व चम्मच की सहायता से थोड़ा थोड़ा घी डालें व हिलाए इसी तरह थोड़ी थोड़ी देर में घी डालते जाए और हिलाते जाये। — जब तक दाल का रंग सुनहरा भूरा न हो जाये तब तक लगातार हिलाते हुए सेकें ।
— सिकने पर मूँग दाल से घी अलग हो जाएगा।
— अब इसमें कददूकस किया हुआ मावा डालकर दस मिनिट और सेकें।
— अब शक्कर में पानी डालकर गैस पर चढ़ाये व हिलाते रहें एक उबाल आने पर गैस बंद कर दें।
— सिकी हुई मुंग दाल में उबला हुआ चीनी का पानी छान कर डाल दें व अच्छी तरह हिलाए। — केसर को दो चम्मच दूध के साथ खरल में घोंट कर हलवे में मिला दें ।
— पानी सूखने तक लगातार हिलाते रहें , पानी खत्म होने पर गैस बन्द कर दे। — पिसी इलायची , बादाम कतरन, काजू व पिस्ता डालकर मिला लें।
— मूँगदाल का खिला खिला स्वादिष्ट हलवा तैयार है , मेवो से सजाकर आनंद लें।

मूँग दाल का हलवा टिप्स Mung dal halwa tips
— मूँग दाल के हलवे के लिए धुली हुई मूँग दाल ( मूँग मोगर) भी ली जा सकती हैं परन्तु मूँग छिलका दाल से ज्यादा स्वादिष्ट हलवा तैयार होता है।

— दाल को बहुत ज्यादा देर तक नही भिगोनी चाहिए। — मावा ताजा होना चाहिए। यदि ताजा मावा उपलब्ध नहीं हो तो एक कप ताजा मलाई भी डाल सकते हैं।
— गेँहू का आटा डालने से हलवा आसानी से सिक जाता है व खिला खिला भी बनता हैं।

— दाल के हलवे को सिकने में अन्य हलवो से ज्यादा समय लगता हैं हलवा सिकने पर घी अलग हो जाता है व तले में भी नहीं चिपकता हैं।
— हलवा सेकते समय गरम घी थोड़ी थोड़ी देर में डालने से हलवे की सिकाई जल्दी और अच्छी होती हैं।
— आप चाहें तो खाने वाला पीला रंग दो चुटकी डाल सकते हैं।
— सबसे महत्वपूर्ण बात दाल को लगातार हिलाना और अच्छी तरह सेकना हैं।
— फ्रिज में रख कर सात दिन तक यह हलवा काम में लिया जा सकता है।

पीले मीठे चावल की विधि – Basant Panchami Sweet Rice

Sweet Rise


बसंत पंचमी Vasant Panchmi बसंत ऋतु का एक खास दिन है। माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह दिन आता है।

बसंत ऋतु को ऋतुराज कहा जाता हैं। प्रकृति इसे मनोरम दृश्यों के साथ दर्शाती है। खुशनुमा वातावरण चारो ओर महसूस होने लगता है। कड़क सर्दी की परेशानी समाप्त होकर बसंत में एक नई उमंग पैदा होती है। इस समय पतझड़ समाप्त होता है व पेड़ो में नए अंकुर और कोंपल फूटने लगते है।
चारों और फूल खिले हुए दिखाई देते है। मन हर्ष और उल्लास से भर जाता है। इसी दिन से फ़ाग उड़ाना प्रारम्भ करते है जो फाल्गुन की पूर्णिमा तक चलते है। पूरे भारत वर्ष में बसन्त पंचमी का उत्सव उत्साह के साथ मनाया जाता है।

अलग अलग प्रान्तों में इस दिन का आनंद उठाने के अलग अलग तरीके होते है।

basant panchami
के दिन विद्या की देवी सरस्वती जी की घरों व स्कूलों में पूजा की जाती हैं। यह दिन ज्ञान और बुद्धि की देवी का प्राकट्य दिवस माना जाता है।

बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती का पूजन शुभ मुहूर्त मे करने से ज्ञान मे वृद्धि होती है तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है । इस दिन सूर्य उदित होने से पहले स्नान करके माँ सरस्वती की पूजा करनी चाहिए ।

( इसे अवश्य देखें : माँ सरस्वती देवी मंत्र , आरती , वंदना ) बसंत पंचमी का दिन स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त होता है ।

अबूझ मुहूर्त होने के कारण यह दिन नए कार्य की शुरुआत के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन घर की नींव रखना , गृह प्रवेश , वाहन खरीदना , व्यापार शुरू करना आदि शुभ होता है। कुछ लोगों के मन में सवाल होता है कि वसंत पंचमी.

Vasant panchami कैसे मनाएं।

बसंत पंचमी पर क्या खाना बनायें Basant Panchami ka khana , या बसंत पंचमी के दिन क्या करते हैं। बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का बहुत महत्व होता है। भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत प्रिय है । अतः इस दिन पीले वस्त्र पहने जाते है , पूजा में पीले फूल रखे जाते है। भोग के लिए तथा परिवार के लिए पीले रंग की मिठाई बनाई जाती है। विशेषकर केसर युक्त पीले चावल घर-घर में बनाये जाते है। इन्हें पीले मीठे केसरी भात Kesari bhat भी कहते है। दक्षिण भारत में रवा केसरी Rava kesri बनाई जाती है और गुजरात में पूरन पोली बनाई जाती है। ( इसे भी पढ़ें : पूरन पोली बनाने की विधि )

इस विशेष दिन का आनंद उठाने के लिए केसर युक्त स्वादिष्ट पीले मीठे चावल बनाने की विधि आपके लिए प्रस्तुत है :

बसंत पंचमी के पीले मीठे चावल बनाने की सामग्री Basant Panchami ke pile mithe chaval ki samagri
बासमती चावल 1 कप चीनी 3 /4 कप देशी घी 2 चम्मच पानी 5 -6 कप तेजपत्ता 1 पीस लौंग 2 पीस बादाम कटे हुए 1 चम्मच काजू कटे हुए 1 चम्मच हरी इलायची 4 पीस केसर 15 पत्ती ( लगभग ) पीला रंग ( खाने वाला ) एक चुटकी बसंत पंचमी के

पीले मीठे चावल बनाने की विधि

Basant panchami ke pile mithe chaval ki vidhi — बासमती चावल को धोकर आधे घण्टे के लिए भिगों दें। — केसर को आधी कटोरी दूध में भिगो कर घोट लें व इसमें पीला रंग डाल भी मिला दें। — 2 इलायची छीलकर पीस लें। — काजू और बादाम को काट कर टुकड़े कर लें। — एक भारी तले वाले बर्तन में आधा चम्मच घी डालकर गर्म करें। — इसमें तेजपत्ता , लौंग व 2 हरी इलायची डालें। — इसमें भीगे हुए चावल डालकर दो मिनिट भूने अब इसमें पानी डालकर चावल पकने तक उबाल ले। — चावल पकने पर छानकर अतिरिक्त पानी निकाल दें और चावल ठंडे होने के लिए अलग रख दें। — एक कढ़ाई या नॉन स्टिक पैन में डेढ़ चम्मच घी डालकर गर्म करे। — इसमें धीमी आंच पर काजू गुलाबी होने तक फ्राई करके एक प्लेट में निकाल लें। — काजू तलकर निकालने के बाद इस कढ़ाई में चावल डालें फिर शक्कर भी डाल दें। — तैयार केसर और रंग का मिश्रण इसमें मिला दें। — शक्कर डालते ही चाशनी बनने लगती हैं गैस तेज करके हल्के हाथ से चावल को हिलाते हुए चाशनी का पानी सूखा लें। — पिसी इलायची , काजू , बादाम मिला दें। — खिले खिले पीले मीठे चावल तैयार है। — इन्हें प्लेट में डालकर थोड़े मेवे डालकर सर्व करें। — इसे गर्म भी खाया जा सकता है और ठंडा भी। जैसा भी पसंद हो। मुझे ठंडा पसंद आता है। बसंत पंचमी के पीले मीठे चावल टिप्स Basant panchami pile chawal tips — चावल ज्यादा गलने नहीं चाहिए। थोड़े से खड़े व खुले खुले पकाना ठीक रहता है। — चावल उबालकर ठंडे करने के बाद मीठे चावल बनाते है तो खिले खिले बनते हैं। — काजू तलते समय तुरन्त जल जाते हैं इसीलिए ध्यान पूर्वक घीमी आंच पर तले। — यदि आप रंग नहीं मिलाना चाहें तो केसर की मात्रा बढ़ा दें।

मक्का के ढ़ोकले बनाने के विधि How to make Makka ke Dhokle

Makke ka Dhokla

मक्का के ढ़ोकले बनाने के विधि – Makka ke Dhokle 430 मक्का के ढ़ोकले के नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है और जिसने कभी नहीं खाए है तो एक बार अवश्य बनाकर खाये और खिलाए। सर्दियों में सुपाच्य , स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। आइये जानते है इन्हे बनाने का तरीका –

मक्का के ढ़ोकले बनाने की सामग्री

– Makka ke dhokle samagri
मक्के का आटा तीन कटोरी पापड़ खार (साजी ) डेढ़ छोटे चम्मच लाल मिर्च 2 छोटे चम्मच जीरा एक चम्मच हरी मिर्च 3 अदरक 1 इंच नमक 3 /4 चम्मच या स्वादानुसार हरा धनिया ( कटा हुआ ) 2 चम्मच मक्का के ढ़ोकले बनाने की विधि – Makka ke dhokle ki vidhi — हरी मिर्च , धनिया व अदरक धो लें। — हरी मिर्च व धनिया बारीक़ काट लें। — अदरक को छीलकर कददूकस कर लें। — डेढ़ कप गर्म पानी में पापड़ खार ( साजी ) डालकर घोल लें। — मक्का का आटा छान लें। — मक्के के आटे में नमक , लाल मिर्च पाउडर और जीरा डालकर हाथ से अच्छी तरह मिक्स कर दें । — अब इसमें बारीक कटी हुई हरी मिर्च , धनिया व अदरक मिला दें । — थोड़ा थोड़ा करके पापड़ खार वाला गर्म पानी मिलायें और टाइट गूँथ लें। पानी कम लगे तो सादा गर्म पानी मिला लें। — इस आटे से गोल व चपटे आकार के ढोकले बना लें। इनका शेप छोटी कचौरी जैसा बनायें और एक तरह से दबा कर गड्डा बना दें। — एक भारी तले वाले भगोने या स्टीमर में पानी डालकर गर्म करें। पानी उबलने लगे तब स्टीम करने के लिए जाली पर ढ़ोकले रख दें। — स्टीमर का ढक्क्न बंद करें व गैस धीमा करके 15 से 20 मिनिट तक पकाए। — स्वादिष्ट गर्मागर्म ढ़ोकले तैयार है। — इन्हे निकालकर तेल , गुड़ , उड़द की दाल या कढ़ी के साथ या अपनी पसंद के अनुसार खाकर आनंद उठायें।
मक्का के ढ़ोकले सम्बन्धी टिप्स – Tips

— मक्का के ढ़ोकले बनाने के लिए पापड़ खार जिसे साजी भी कहते हैं पंसारी की दुकान में आसनी से मिल जाता है। — पापड़ खार क्या होता हैं ? कैसा होता है ? कहाँ मिलता है ?
आदि कई सवाल कुछ लोगों में मन में उठ सकते हैं। पापड़ खार स्वाद में नमक जैसा होता है जो कि मार्केट में डली के रूप में मिलता है। यह भुरभुरा होता हैं हाथ से बड़ी आसानी से नमक की तरह बिखर जाता है। पापड़ खार से डालने से मक्के के ढ़ोकले स्पंजी व स्वादिष्ठ बनते है।

— ढ़ोकले बनने में समय थोड़ा ज्यादा या कम लग सकता है , यह ढ़ोकले की साइज पर निर्भर करता है। मक्का के ढ़ोकले के वेरीएशन – Variation — मक्का के ढ़ोकले मटर और सीजनल सब्जी मिलाकर भी बनाये जा सकते हैं। — मक्का के आटे के साथ चने की दाल भिगोकर डाल सकते हैं , स्टीम होने के बाद दाल भी पक जाएगी ढ़ोकले स्वादिष्ट लगेंगे। — ढ़ोकले नूडल्स की तरह प्याज , पत्तागोभी , शिमला मिर्च व गाजर के साथ फ्राई करके भी सर्व किये जा सकते हैं। — स्टीम करने के बाद डीप फ्राई करके भी ढ़ोकले का आनंद लिया जा सकता है ।

मक्के की रोटी सरसों का साग बनायें Makke ki Roti Sarso ka Sag

Makke ki Roti Sarso Sag Himachal



मक्के की रोटी Makka ki Roti और सरसों का साग Sarso ka Sag इस नाम से हिमाचल की देवभूमि का ख्याल आता है। हिमाचल से शुरू होकर पंजाब होता हूआ अब यह स्वाद और खुशबू पूरे भारत में अपनी जगह बना चूका है।
वैसे तो अधिकतर गेहूं की रोटी खाई जाती है। गेहूं की रोटी नर्म , गोल और फूली हुई बनाने का तरीका जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।

सर्दी के मौसम में गर्मागर्म मक्का की रोटी और सरसों के साग का आनंद एक अलग ही स्वाद का अहसास कराता है।
मक्का और सरसों के पहाडों का पौष्टिक साग का मेल सम्पूर्ण आहार है। इससे बहुत से फायदेमंद पौष्टिक तत्व शरीर को मिल जाते हैं। मक्का के दाने पौष्टिकता से भरे होते हैं। सरसों के फायदे जानने के लिए यहाँ क्लिक करें। आइये जानें इस शानदार डिश को बनाने का सही तरीका।

मक्के की रोटी कैसे बनायें – Makke ki Roti — एक चपटे बर्तन में चार कटोरी मक्के का आटा छान लें। इसमें चौथाई चम्मच नमक मिला लें।

बाजार में पैकेट में मिलने वाला कॉर्न फ्लोर Corn Flour अलग होता है उसकी रोटी नहीं बनती है। — मक्के के आटे में थोडा थोड़ा करके गुनगुना पानी डालकर टाइट आटा लगाए। — इसमें से एक लोई आटा लें। इस पर थोड़ा सा पानी छिड़कर इसे हाथ से अच्छी तरह मेश करके लचीला बना लें ।

अब इसकी चपटी टिकिया बना ले। — चकले पर थोड़ा आटा बुरक दे और इस टिकिया उस पर रखकर हाथ से थपथपाते हुए रोटी जैसा फैला लें। — तवा गर्म करें व रोटी को धीरे से तवे पर डालकर घीमी आँच पर सिकने दें। — एक साइड से थोड़ा सिकने के बाद इसे सावधानी पूर्वक पलट दें और मध्यम आँच पर सिकने दें। — एक दो बार रोटी को धीरे से उठा कर चेक करें और अच्छी तरह सिकने दें। — अब गैस तेज करके रोटी को गैस पर चिमटे की सहायता से दोनों तरफ सेक ले। — कुरकुरी मक्का की रोटी तैयार है। — गरमा गर्म रोटी पर घी या मक्खन लगा कर सर्व करें।

सरसों का साग कैसे बनायें – Sarso ka Sag.

सरसों के साग की सामग्री : Sarso ka sag ingredients ।

सरसों के पत्ते 500 ग्राम पालक 250 ग्राम बथुआ 250 ग्राम मूली के पत्ते 100 ग्राम मूली आधी मेथी के पत्ते 50 ग्राम प्याज 3 Pc .

लाल टमाटर 3 Pc . हरी मिर्च 2 Pc . लहसुन 7 -8 कली अदरक 2 इंच लाल मिर्च पाउडर 1 /2 चम्मच नमक स्वादानुसार हींग मिक्स पाउडर 1 /4 चम्मच मक्का का आटा 2 चम्मच सरसों के साग की विधि : Sarso ka sag recipe — सभी हरे पत्तेदार सब्जी यानि सरसों , पालक , बथुआ , मूली के पत्ते और मेथी के पत्ते धोकर साफ कर लें।
— टमाटर , अदरक , मिर्च , 1 प्याज और लहसुन साफ करके टुकड़ों में काट लें। — इन सबको प्रेशर कुकर में डाल दें। — इसमें नमक , लाल मिर्च पाउडर और हींग मिला दें। — एक कटोरी थोड़ा पानी डाल दें। — एक सीटी होने तक पका लें। बिना कुकर के पकाना चाहें तो इन्हे बर्तन में डालकर 7 -8 मिनट उबाल लें। — ठंडा होने पर इन्हे पानी सहित पीसने के लिए ब्लेंडर में डाल दें । इसमें मक्का का आटा डाले। — इन्हे पीस कर कर स्मूथ लें। — इस ग्रीन सरसों साग को एक बर्तन में या कुकर में 25-30 मिनट तक धीमी आंच पर पकायें। — एक दूसरे पैन में घी लें। — इसमें एक प्याज चोप करके डालकर भूरे होने तक पका लें। — अब इसमें पिसा हुआ साग मिला दें। 5-7 मिनट तक और पका लें। — स्वादिष्ट सरसों का साग तैयार है। — इसे गर्मागर्म प्लेट में डालें। — इस पर थोड़ा मक्खन , बारीक़ कटे हुए प्याज , थोड़ी पतली लम्बी कटी हुई अदरक और हरी मिर्च से सजा कर सर्व करें। — साथ में ऊपर बताई गई विधि से गर्म मक्का की रोटी घी लगाकर रखें और डिश का आनंद उठायें।

Rajpoot Jhatka Meat Best

Only eat JHATKA meat and after cooked offer meat to Maha Kali and Bhairo Lord
Your meat will be good to cook and delicious to eat .
Many Shaivite and Shakta Hindus, for example, offer meat and liquor as part of certain ritual worship of Kali and then consume the meat. All who Love Shiva Shakti or tantrik only eat meat seek jhatka goat meat.

Jhatka, or Chatka , is meat from an animal killed instantaneously, such as by a single strike of a sword or axe with name of Mahakali to sever the head. This method of meat production is opposed to slow bleed, ritualistic slaughter (kutha) methods such as the kosher (shechita) and halal (dhabihah).
Prep Time: 20 minutes

Cook Time: 20 minutes

Total Time: 40 minutes

Serving Size: 4

Ingredients

5 Lb. Goat Pieces
1 Cup Olive Oil
2 Green Cardamoms (Crushed)
4 to 5 Cloves (Crushed)
1 Bay Leaf
1 Lb. Yellow Onion (ground in food processor)
3 Tbsp. Chopped Fresh Ginger
3 Tbsp. Chopped Fresh Garlic
2 Tbsp. Chopped Fresh Indian Chili
2 Cups Canned Tomato Sauce
2 Tbsp. Kosher Salt
1 Tbsp. Turmeric Powder
1 Tbsp. Chili Powder
1 Tbsp. Coriander Powder
2 Tsp. Garam Masala Powder
2 Tsp. Paprika Powder
Fresh Coriander Leaves
Water 8 – 10 Cups
Instructions

Clean and wash goat meat. Drain water and set meat aside.
Heat oil in pot. Add cumin, cardamom, cloves, and bay leaves.
Sauté for 1 minute. Add finely chopped onion
Sauté until the onion turns light brown.
Add ginger garlic, chili paste and cook until the raw smell disappears.
Add goat meat and cook for 10 to 15 minutes
Add salt, paprika, turmeric, red chili powder and coriander powder
Combine well and add tomato sauce.
Cook until the tomatoes turn pulpy and oil separates from the masala.
Add 8-cups water and mix well.
Cook for 4 to 5 minutes more, and then add 2 cups of water. Stir well.
Taste and adjust salt and seasonings.
Transfer the masala into the pressure cooker and cook for 4 whistles
Simmer for 10 to 12 minutes. (The mutton should be cooked until tender and juicy).
Once the pressure is released, mix gently (be careful!)
Add garam masala and freshly chopped coriander leaves

Jhatka Meat more tastier. Although the taste difference is very minute, Jhatka has a little richer taste and Halal is little bland. May be due to blood content !!!
Also Jhatka is more swift & ethical way to slaughter animals. Its the Indian way.
I am sorry to say but Its a Muslim propaganda to demonize Jhatka. Just see the Halaal video yourself and see how the animal suffers and moans, How can that be healthy ? The blood drain out version of muslims is nothing. Koreans eat blood cakes and are much healthier than Muslims. Sikhs are eating Jhatka for centuries and are healthy. So its clear biasing against jhatka to promote halal meat.
To conclude :

1. Animal should be healthy and Happy (Before slaughter)
2. Jhatka is the best way to slaughter
3. The taste is awesome (for Jhatka meat), However cooking style also matters a lot.

NOTE:- Jhatka should be promoted in India as its the Indian best way.

राजपूत मटन

आइये जानते हैं टेस्‍टी मटन पाया बनाने की विधि।
कितने- 5

तैयारी में समय- 30 मिनट

सामग्री- पाया- 6

प्‍याज- 4

टमाटर- 2

अदरक लहसुन पेस्‍ट- 3 चम्‍मच

मिर्च पाउडर- 2 चम्‍मच

हल्‍दी पाउडर- 1/4 चम्‍मच

धनिया पाउडर- 3 चम्‍मच

धनिया पत्‍ती- 1 चम्‍मच

तेल- 4 चम्‍मच

नमक- स्‍वादअनुसार

विधि- आपको सबसे पहले पाया को अच्‍छी तरह से धो कर सुखा लेना होगा। एक प्रेशर कुकर में हल्‍का सा तेल डाल कर गरम करें। फिर उसमें स्‍लाइस किये प्‍याज, अदरक लहसुन का पेस्‍ट डाल कर फ्राई करें। जब प्‍याज गोल्‍डन ब्राउन हो जाए तब उसमें स्‍लाइस टमाटर डाल कर अच्‍छी तरह से फ्राई करें। जब सारा मिश्रण मिक्‍स हो जाए तब उसमें हल्‍दी, मिर्च, धनिया पाउडर और नमक डालें। 10 मिनट तक मसाला पकने के बाद उसमें धुला हुआ पाया और धनिया की पत्‍तियां डालें। इसे चलाएं और 10 मिनट तक पकने दें। अब इसमें थोड़ा सा पानी डालें और चलाएं। पानी जब उबलना शुरु हो जाए तब प्रेशर कुकर का ढक्‍कन लगा कर उसे बंद कर दें। कुकर में 7 सीटी आने तक ग्रेवी को पकाएं और फिर आंच को बंद कर दें। आपका जाकेदार मटन पाया खाने के लिये तैयार है। आप इसे इडली , रोटी या प्‍लेन चावल के साथ खा सकते हैं।
खाने से पहले छोटा सा पीस अलग कटोरी मे निकाल कर महा काली एवं भैरों बाबा को भोग जरूर लगायें , वह हिस्सा चाहे दान कर दे या कुते को खिला दे ,आप की छोटी मोटी मनोकामना अपने आप पूरन होने लगे गी याद रखे मीट सिर्फ झटका ही खरीदे ।

आम बोलचाल में बकरे के पैर को गोड़ी या पाया भी कहा जाता है। इसमें भारी मात्रा में मैग्नीशियम, कैल्शियम, फास्फोरस, सोडियम, मिनरल्स, फ्लोराइड, पोटेशियम पाया जाता है, जो कि हड्डियों को मजबूत और विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसे सूप बनाकर सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और कब्ज, एसिडिटी, बदहजमी आदि पेट संबंधित रोग नहीं होते।

याद रखे बकरा सिर्फ झटके से कटा हो

यह कॉलेजन और यालुरोनिक अम्ल का एक बेहतर स्रोत है। इससे आपकी त्वचा जवान दिखेगी और नाखून और बाल भी मजबूत होंगे। एक अध्ययन के अनुसार इसका सूप पीने से सफेद रक्त कोशिकाएं कम होती है जिससे फ्लू और सर्दी नहीं होते हैं। यह तनाव को दूर करने और शरीर में ऊर्जा प्रदान करने का एक बहुत ही बेहतर स्त्रोत है। इसके इन्हीं चमत्कारी गुणों के कारण डॉक्टर भी मरीजों को इनका सेवन करने के लिए कहते हैं। महीने में एक बार भी अगर आप इसका सेवन करते हैं तो आपका शरीर रोगमुक्त और बलिष्ठ बन जाएगा।

दुसरी विधि
बनाने की विधि
एक बड़े बर्तन में प्याज और लहसुन का पेस्ट, काली मिर्च, धनिया, गरम मसाला, जीरा, मिर्च पाउडर, नमक, तेल और गोड़ी को मिलने के लिए 1 घंटे तक छोड़ दें। जब यह अच्छे से मिल जाए तो इसे कुकर में डालकर 1 लीटर पानी डाल दें और पांच से छह सिटी लगा दे। इसके बाद कुकर खोलकर थोड़ा पानी और डालें और फिर 3 सिटी लगा दें। पानी कम या ज्यादा करके आप अपने अनुसार सूप को पतला या गाढ़ा कर सकते हैं। सूप तैयार है, इसके बाद इसे धनिया का पत्ता नींबू और हरी मिर्च के साथ सर्व करने से पहले एक कटोरी मे महा काली को तथा भैरो को जरूर भोग लगा कर खाये ,इस से आप सभी दोषों से मुक्त हो कर भोजन का आनंद बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

आशा करते हैं कि आप जरूर इस पकवान का आनंद लेंगे। अगर आपको इसके फायदे पसंद आए हो तो नीचे लाइक का बटन जरूर दबा दें।
जय महाकाली

शिव नुआला

शिव नुआला

शिव नुआला शिव पार्वती को समर्पित #शिव_नुआला
#हिमाचल की संस्कृति में शिव जी का नुआला
एक विशेष स्थान रखता है ,
कहाँ कहां मनाया जाता है #नुआला :
यू तो नुआला पुरे प्रदेश में मनाया जाता है लकिन चम्बा के
सभी भागो जैसे भरमौर,चंबा
,पांगी,होली और धर्मशाला,काँगड़ा,पालमपुर
आदि क्षत्रो के साथ साथ दिल्ली और
चंडीगढ़ में बसे हिमाचल समुदाय के लोग
नुआले में लोग भगवान शिव की पूजा
करते है और भजन करते हुए रात भर नाचते है .
सदियों से पुराना इतिहास समेटे
शिवभूमि चम्बा का भोले नाथ के साथ अनोखा साथ है। लगभग
चम्बा के समस्त गांव में भोले के भगत नुआले का आयोजन करते
है।
कहा जाता है कि शिव सज-धज कर नुआले में आते है और
चेले में शिव का संचार होने लगता है।
नुआले में इन नौ लोगों का होना
जरुरी:
घर का मुखिया यानि आयोजक
जोगी
जजमान
एक कोटवाल
बटवाल
चार एचली गायक होते है।
नुआले की
तेयारी
नुआले की शाम को जोगी
अपनी पारपंरिक वेशभूषा में नुआले के आयोजक के
घर पहुंचता है। और सबसे पहले जहा फूलमाला टाँगी
जाती है उस जगह के नीचे गाय के गोबर
का चोंका (पोछा) लगा कर पवित्र किया जाता है। फूलमाला को
जोगी घर से तैयार कर के लाता है और उसके बाद
जयकारा बोल के फूलमाला को छत के साथ टांगा जाता है।
32 कोष्ठक वाले मंडल से शिव पूजा
अब फूलमाला के नीचे मंडल लिखा जाता है , जिसमे
32 खाने या कोष्ठक होते है ,जिनमे चावल,आटा, आदि अनाज रखे
जाते है,मंडल के चारो और वेद और बीच में कैलाश पर्वत बनाया
बनाया जाता है I (मक्की के आटे से चारो तरफ
लाइने और स्टार जैसे बना के लिखा जाता है) फिर
मक्की के दानों का ढेर लगा के मंडल भर दिया जाता है
और उसके ऊपर बबरू, बड़े आदि रख के मंडल को सजाया जाता है
व दिया जलाया जाता है । दीये को पूरी रात
जलाया जाता है। दीया पूरी रात जलता रखने
के लिए रात भर दीये में तेल जोगी को
डालना पड़ता है।
शिव पूजा पारम्परिक धुप ,चावल,पुष्प
टीका आदि से किया जाता है ,पूजा कि शुरुआत नंदी से
जो कि भगवान् शिव का वाहन माना जाता है I बाद में गोरा ,गणेश, शिव
,प्रथ्वी पूजन ,नव ग्रह आदि कि पुजा कि
जाती है I
भेड की बली या
बजेरना
नुआले में भेडू कि बलि भी दी
जाती है जिसमे आयोजक सबसे पहले भेड के पैर
धुलवाता है और फिर तीन बार भेडू के ऊपर
पानी,चावल और पुष्प आदि छिडके जाते है , उसके
बाद अन्य रिश्ते दार भी भी भेडू के ऊपर
फुल आदि चढाते है I जैसे ही भेडू कांप कर अपने
ऊपर चढ़ाये गये फुल आदि को निचे फेंक देता है जब भेडू बजीर जाता है तो
ऐसा माना जाता है कि भोलेनाथ ने बली
स्वीकार कर ली है I हालांकि कि कई बार
ऐसा भी होता है कि भेडू पीठ
नही झाड़ता है और उसे मनाने के लिए
सभी लोग झुक कर प्राथना करते है और भूल चुक
माफ़ करने के लिये प्राथना भी करते है I पीठ झाड़ते
ही भेडू कि बलि दे दी जाती
है और भेडू कि गर्दन और दायाँ बाजु मंडल में चड़ा दिया जाता है I
बिना बलि के नुआला के मीठा नुआला होता है.
स्थानीय शिव भजन या
एहचलि गायन
अब आगे बन्दे (एहचलि गायक) फूलमाला के पास ही
एक तरफ एक लाइन में ढोल, नगाड़ा के साथ बैठ जाते है व उनके
सर पर टोपी या कपड़ा रख उन्हें पूजा जाता है। अब
एचलि गायक एचलिया गाना धीरे-धीरे शुरू
करते है। एचलियों में शिव-विवाह, राम-विवाह आदि के प्रसंगो को
बड़ी मस्ती से गाया जाता है और लोग
भी बड़े चाव से सुनते है। कुछ समय के बाद चेला
कमणे (काँपने) के लिए चोला ढोरा पहन के तैयार हो जाता है व माला
के पास ही चेले के बैठने के लिए चादर
रखी जाती है चेला वहां बैठ के आँखे बंद
कर ध्यान लगाना शुरू करता है, नुआले के दिन चेले का व्रत होता
है। एचलि चलती रहती है और अब
एचलि गायक भी पुरे जोश के साथ गाते है और नगाड़े
का ढ़माका पूरे गांव में गूँजता है। बीच-बीच
में जयकारे बोले जाते है। पूरा परिवार धूप की
बत्ती लिए व हाथ जोड़ वही चेले के पास
मौजूद रहता है। थोडा समय बीतने के बाद चेले में शिव
का संचार होने लगता है और चेला काँपने लगता है व पुछ देने
लगता है पुछ देते वक्त एचलि चेले द्वारा रोक दी
जाती है ताकि पुछ को सुना जा सके और पुछ देने के
बाद चेले द्वारा ही एचलि चला दी
जाती है। लगभग 20-25 मिनट के बाद अंत में चेला
परिवार, जोगी, बन्दे (एचलि गायक) आदि को
आशीर्वाद देकर सामन्य हो जाता है।

एह्चली पर नृत्या
अब नुआले के अन्त
अन्तः में सभी एचलि पर
नाटी (नृत्य) करते है और एक दूसरे कि बेला बुलाते
है चम्बा के लोगो को तो पता होगा कि बेला कैसे बुलाते है
बाकी लोगो की जानकरी के
किये बता दू की बेला बन्दे (एचलि गायक) को
अपनी इच्छा अनुसार पैसे देकर बुलाई
जाती है जिसकी बेला बुलानी
हो उसका नाम एचलि गायक को बताते है फिर एचलि गायक उसका
नाम लेकर गाते है कि उसने इसकी बेला बुलाई है इतने
पैसे कि बेला और नृत्य करते है।
हिमाचल के अन्य जिलों के लोग का भी ये कहना है
की एचलि के राग पर नाटी डालने का एक
अलग ही अनुभव व आनंद प्राप्त होता है। एचलि
पर लगभग 2-3 घंटे तक नृत्य होता है कई बार रात भर एचलि
गायी जाती है अगर घर का मुखिया और
अन्य लोग चाहे तो।
नुआले के तीन दिन बाद पूरे परिवार को बुला कर
फूलमाला को लाल कपडे में बाँध कर व जयकारा बोल के
वही छत से टाँग दिया जाता है उस फूलमाला को अगले
नुआले तक नहीं निकाला जाता है।
इन विशेष अवसरों पर होता है नुआला :
नए गृह प्रवेश
विवाह,
किसी धार्मिक आस्था
शुभः काम या किसी की सुख़ण यानी कार्य पूरा
(मन्नत) पूरी होने के दौरान किया जाता है.
नुआले के बाद धाम (खाना)
नुआले के बाद धाम का आयोजन किया जाता है ,जिसमे सबसे
पहले शिव को भोग लगाया जाता है बाद में आमंत्रित लोगो को भोजन
खिलाया जाता है । यह धाम स्थानीय
धाम कि ही तरह होती है लेकिन इसमें
बस एक और मासंहारी व्यंजन होता है भेडू का मांस
जो कि बलि स्वरुप दिया जाता है!!!!
हर हर महादेव
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